Hindi Poems for Kids

Hindi Poems for Kids

बच्चों की हिन्दी कविताएं — पिटारा का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children

गड़बड़ घोटाला

यह कैसा है घोटाला कि चाबी मे है ताला कमरे के अंदर घर है और गाय में है गोशाला। दातों के अंदर मुंह है और सब्जी में है थाली रूई के अंदर तकिया और चाय के अंदर प्याली। टोपी के ऊपर सर है। और कार के ऊपर रस्ता ऐनक पे लगी हैं आंखें कापी किताब में बस्ता। सर के बल सभी खड़े हैं पैरों से सूंध रहे हैं घुटनों में भूख लगी है और...

चौका छक्का

धूम धड़क्का धूम धड़क्का सचिन का चौका सचिन का छक्का रह गए सारे हक्का बक्का चौका छक्का धूम धड़क्का कविता 1 हक्का बक्का : बच्चों के लिए 15 हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book Trust

कितनी बड़ी दिखती होंगी

कितनी बड़ी दिखती होंगी मक्खी को चीजें छोटी सागर सा प्याला भर जल पर्वत सी एक कौर रोटी। खिला फूल गुलदस्ते जैसा कांटा भारी भाला सा तालों का सूराख उसे होगा बैरगिया नालासा। हरे भरे मैदानों की तरह होगा इक पीपल का पात पेड़ों के समूहसा होगा बचा खुचा थाली का भात। ओस बूंद दरपनसी होगी सरसो होगी बेल समान सांस मनुज की आंधीसी करती होगी...

ज़रा चख के देखो

ज़रा चख के देखो ज़रा चख के देखो ये है बड़ी मज़ेदार ये है मज़ेकी नगर नगर में शहर शहर में देखों आगे पीछे चढता दाम सब चीज़ों का हम गिरते हैं नीचे ...जरा चख के देखो नये नगर में बजता हैं इक नये किसम का बाजा अब तो राजा गधा बनेगा गधा बनेगा राजा नसीब अपना टूटा फूटा नसीब अपना खोटा ज़मींदार का कु ...जरा चख के देखो बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for...

लकड़ी का घोड़ा

घो घो घो घोड़ा लकड़ी का घोड़ा चाबुक न कोड़ा जब इसको मोड़ा भागा ये घोड़ा भागा ये घोड़ा लकड़ी का घोड़ा घो घो घो घोड़ा। कविता 5 हक्का बक्का : बच्चों के लिए 15 हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book Trust

आलपिन के सिर होता

आलपिन के सिर होता पर बाल नहीं होता है एक कुर्सी के टांगे हैं पर फुटबाल नहीं फेंक सकती है फेंक। कंघी के हैं दांत मगर वह चबा नहीं सकती खाना गला सुराही का है पतला किन्तु न गा सकती गाना। जूते के है जीभ मगर वह स्वाद नहीं चख सकता है आंखे रखते हुए नारियल कभी न कुछ लख सकता है। है मनुष्य के...

गोपाल के गाल

गोपाल के गाल गोलम गोल लालम लाल रंग सुनहरा आंखें सुंदर घुंघराले से उसके बाल छोटा सा वो नटखट भोला करता कितने कई कमाल कभी फोड़ वो मटकी देता कभी हाथ ले बंसी लेता चोरी माखन की भी करता रोज़ मचाता कई धमाल प्यारा फिर भी मीत सभी का डरता जो वो उसकी ढाल गोलम गोल लालम लाल गोपाल के गाल। बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for children

मुन्ना और दवाई

मुन्ना ने आले पर ऊंचे आले पर जब छोटे हाथ नहीं जा पाये खींच खींच कर अपनी छोटी चौकी ले आये। पंजों के बल उस पर चढ़कर एड़ी भी उचकाई। मुन्ना ने आले पर रक्खी शीशी तोड़ गिराई। हाथ पड़ा शीशी पर आधा खींचा उसे पकड़ कर वहीं गिरी वह आले पर से इधर उधर खड़बड़ कर। शीशी तोड़ी कांच बिखेरा सारी दवा बहाई। मुन्ना ने आले पर रक्खी शीशी तोड़...

नट खट हम हां नटखट हम

नट खट हम हां नटखट हम। करने निकले खट पट हम आ गये लड़के पा गये हम। बंदर देख लुभा गये हम बंदर को बिचकायें हम। बंदल दौड़ा भागे हम बच गये लड़के बच गये हम। बर्र का बांस उठाकर आ गये हम ऊधम लगे मचाने हम आ लड़कों पर टूट पड़े झटपट हट कर छिप गये हम। बच गये लड़के बच गये हम बिच्छू एक पकड़ लाये। उसे छिपाकर ले आये सबक...

ताती ताती तोता

ताती ताती तोता पिंजरे में सोता पंख जो हरे थे उड़न से भरे थे हो गये हैं पीले पड़ गये हैं ढीले ताती ताती तोता। ताती ताती तोता पिंजरो में रोता झांखते हैं प्यारे नन्हें नन्हें तारे कहते है तोता काहे को तू रोता अंधकार छोड़ दे पिंजरो को तोड़ दे उड़ते उड़ते सारी रात आके मिल जा अपने साथ छोटे भाई तोता प्यारा तू भी बन जा एक सितारा बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for children