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Hindi Poems for Children

बच्चों की हिन्दी कविताएं — पिटारा का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children

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बांसुरी वाला

बांसुरी वाला

बात सात सौ साल पुरानी सुनो ध्यान से प्यारे हैम्लिन नामक एक शहर था वीजर नदी किनारे। यूं तो शहर बहुत सुन्दर था हैम्लिन जिसका नाम मगर वहां के लोगों का हो गया था चैन हराम। इतने चूहे इतने चूहे गिनती हो गई मुश्किल जिधर भी देखो जहां भी देखो करते दिखते किल बिल। बाहर चूहे घर में चूहे दरवाजे और दर में चूहे खिड़की और आलों में चूहे थालों और प्यालों में चूहे। ट्रंक में और संदूक में चूहे फौजी की बंदूक में चूहे अफसर की गाड़ी में चूहे नौकर की दाढ़ी में चूहे। पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण जिधर भी देखो चूहे ऊपर नीचे आगे पीछे जिधर भी देखो चूहे। दुबले चूहे मोटे चूहे लंबे चूहे छोटे चूहे काले चूहे गोरो चूहे भूखे और चटोरो चूहे। चूहे भी वो ऐसे चूहे बिल्ली को खा जाए चीले जान बचाएं। चूहो से घबराकर राजा ने किया ऐलान जो उनसे पीछा छुटवाये पाये ढ़ेर ईनाम। सुनकर ये ऐलान वहां पर पहुंचा एक मदारी मस्त कलंदर नाम था उसका मुंह पर लंबी...

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मेरी रेल

छूटी मेरी रेल। रे बाबू छूटी मेरी रेल। हट जाओ हट जाओ भैया मैं न जानूं फिर कुछ भैया टकरा जाये रेल। धक् धक् धक धक् धू धू धू धू भक् भक् भक् भक् भू भू भू भू छक् छक् छक् छक् छू छू छू छू करती आई रेल। एंजिन इसका भारी-भरकम। बढ़ता जाता गमगम गमगम। धमधम धमधम धमधम धमधम। करता ठेलस ठेल सुनो गार्ड ने दे दी सीटी। टिकट देखता फिरता टीटी। सटी हुई वीटी से वीटी। करती पेलम पेल। छूटी मेरी रेल। बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book Trust,...

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चतुर चित्रकार

चतुर चित्रकार

चित्रकार सुनसान जगह में बना रहा था चित्र। इतने ही में वहां आ गया यम राजा का मित्र।। उसे देखकर चित्रकार के तुरंत उड़ गये होश। नदी पहाड़ पेड़ फिर उसको कुछ हिम्मत आई देख उसे चुपचाप। बोला सुन्दर चित्र बना दूं बैठ जाइये आप।। उकरू मुकरू बैठ गया वह सारे अन्ग बटोर। बड़े ध्यान से लगा देखने चित्रकार की ओर।। चित्रकार ने कहा हो गया आगे का तैयार। अंब मुंह आप उधर तो करिये जंगल के सरदार।। बैठ गया वह पीठ फिराकर चित्रकार की ओर। चित्रकार चुपके से खिसका जैसे कोई चोर।। बहुत देर तक आंख मूंदकर पीठ घुमाकर शेर। बैठ बैठ लगा सोचने इधर हुई क्यों देर।। झील किनारे नाव लगी थी एक रखा था बांस। चित्रकार ने नाव पकड़कर ली जी भरके सांस।। जल्दी जल्दी नाव चलाकर निकन गया वह दूर। इधर शेर था धोखा खाकर झुंझलाहट में चूर।। शेर बहुत खिसियाकर बोला नाव जरा ले रोक। कलम और कागज तो ले जा रे कायर डरपोक।। चित्रकार ने कहा तुरन्त ही रखिये अपने पास। चित्रकला का...

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ना धिन धिन्ना

ना धिन धिन्ना

ना धिन धिन्ना पढ़ते हैं मुन्ना ताता थैया आ जा भैया ता थई ता थई ना भई ना भई धिरकिट धा तू सिर मत खा तू धीं तृक धीना झटपट रीना धा-धा-धा-धा अब क्या होगा धिरकिट धिरकिट गिरगिट गिरगिट धा धीना धीना धीना वो देखो दीनू बीना धा धीना नाती नक भैया गया है थक धन-धिन्ना धा धिनक इमली गई है पक ना तिन्ना तिरकिट तान कहना तू मेरा मान धिरकिट धिरकिट धिन जाऊंगा मैं वहां तिरकिट तिरकिट तिन ता चल जा तू झटपट आ ना तिन तिन्ना ना धिन धिन्ना बस्ता पटक कर दौड़े मुन्ना धागे तिरकिट तूना भागे सरपट दीनू टिल्लू रीना मीना बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book...

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बतूता का जूता

बतूता का जूता

इब्न बतूता पहन के जूता निकल पड़े तूफान में थोड़ी हवा नाक में घुस गई घुस गई थोड़ी कान में। कभी नाक को कभी कान को मलते इब्न बतूता इसी बीच में निकल पड़ा उनके पैरों का जूता। उड़ते उड़ते जूता उनका जा पहुंचा जापान में इब्न बतूता खड़े रह गये मोची की दुकान में बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book...

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गड़बड़ घोटाला

गड़बड़ घोटाला

यह कैसा है घोटाला कि चाबी मे है ताला कमरे के अंदर घर है और गाय में है गोशाला। दातों के अंदर मुंह है और सब्जी में है थाली रूई के अंदर तकिया और चाय के अंदर प्याली। टोपी के ऊपर सर है। और कार के ऊपर रस्ता ऐनक पे लगी हैं आंखें कापी किताब में बस्ता। सर के बल सभी खड़े हैं पैरों से सूंध रहे हैं घुटनों में भूख लगी है और टखने ऊंघ रहे हैं। मकड़ी में भागे जाला कीचड़ में बहता नाला कुछ भी न समझ में आये यह कैसा है घोटाला। इस घोटाले को टालें चाबी तालें में डालें कमरे को घर में लायें गोशाला में गाय को पालें। मुंह में दांत लगाये सब्जी से भर लें थाली रूई तकिए में ठूंसें चाय से भर लें प्याली। टोपी को सर पर पहनें रस्ते पर कार चलायें आंखों पे लगायें ऐनक बस्ते में किताबे लायें। पैरों पे खड़े हो जायें और नाक से खुशबू सूंघें भर पेट उड़ाये खाना और आंख मूंद के ऊंघे। जाले...

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चौका छक्का

धूम धड़क्का धूम धड़क्का सचिन का चौका सचिन का छक्का रह गए सारे हक्का बक्का चौका छक्का धूम धड़क्का कविता 1 हक्का बक्का : बच्चों के लिए 15 हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book...

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कितनी बड़ी दिखती होंगी

कितनी बड़ी दिखती होंगी मक्खी को चीजें छोटी सागर सा प्याला भर जल पर्वत सी एक कौर रोटी। खिला फूल गुलदस्ते जैसा कांटा भारी भाला सा तालों का सूराख उसे होगा बैरगिया नालासा। हरे भरे मैदानों की तरह होगा इक पीपल का पात पेड़ों के समूहसा होगा बचा खुचा थाली का भात। ओस बूंद दरपनसी होगी सरसो होगी बेल समान सांस मनुज की आंधीसी करती होगी उसको हैरान बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book...

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