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Hindi Stories for Children

बच्चों की हिन्दी कहानियाँ — पिटारा का हिन्दी कहानी संग्रह | Hindi stories for children — A collection of Hindi stories for children

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ओमू ने खुशियां खरीदीं

देहरादून लौटते हुए काका ने ओमू को दस रूपये थमाए। काका दफ्तर के किसी काम से ओमू के गांव आए थे और उसी के घर में उसके परिवार के साथ ठहरे हुए थे। उस दौरान ओमू ने उनकी खूब टहल की थी। उसने उन्हें गांव भर में खूब घुमाया फिराया था। उनके छोटे छोटे काम कर समय पर मदद की थी। काका को ओमू बहुत पसन्द था। उन्होंने ओमू के पिता से ओमू को अपने साथ देहरादून चलने की बात भी की थी। काका ने कहा था कि वे ओमू को देहरादून के किसी अच्छे विद्यालय में भर्ती करा देंगे और उसके बाद कालेज भी भेजेंगे। काका सम्पन्न थे और उनकी कोई औलाद भी नहीं थी। ओमू के पिता गांव की ही एक पाठशाला में चौकीदार थे। उन्होंने नम्रता से परन्तु दृढ़ होकर काका की बात का जवाब दिया था। बच्चे की चहकती आवाज़ और खिलखिलाती हंसी के बिना हमारा घर भला घर जैसा कहां रहेगा। नहीं, नहीं हम अपने बेटे के बिना नहीं रह पाएंगे। ओमू को इससे पहले खर्च करने के लिए दस रूपये कभी नहीं मिले थे… मां! काका ने मुझे दस रूपये दिए। मैं इसका क्या करूं। अपने लिए कुछ अच्छा सा खरीदो ओमू। शायद तुम्हारे […]

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बैंगन के गुण

बबलू बहुत देर से अपनी बहन से झगड़ रहा था। बहन उससे बड़ी थी और काफी देर से सब्र कर रही थी। आखिर उसे गुस्सा आ गया। बोली चुप करता है या नहीं, वरना मार मार कर भरता बना दूंगी। बबलू सिर्फ झगड़ालू ही नहीं खाने का भी बड़ा शौकीन था। उसने भरता सुनते ही बहन की जुबान पकड़ ली, अरे वाह! भरता तो मुझे बेहद पसंद है। बैंगन का भरता गरमा गरम पराठे के साथ। बहन ने समझ लिया कि अपने पाजी भाई से जीतने वाली वह नहीं। उसने ही सुलह करने की पहल की। पेटु राम, जब देखो तब खाने की सूझती है। अच्छा यह बताओ भरता खाना है बैंगन का। बबलू इतनी आसानी से समझौता करने वाला जीव नहीं था। उसने कहा, मुझे बैंगन का भरता थोड़ी खाना है मुझे तो बघार के बैंगन ज्यादा पसन्द है। इसी बीच बच्चों की मां कमरे में आ पहुंची। पहले तो वह झगड़ा शान्त कराने के इरादे से निकली थी पर बघार के बैंगनों का जिक्र सुनते ही वह भी पहेलियां बुझाने लगी… बघार के बैंगन सिर्फ पसंद ही हैं या यह भी पता है कि बनते कहां है। इससे पहले कि बड़ी बहन बाजी मार ले जाए बबलू ने […]

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प्यारे पिताजी

कहानी का प्रथम अंश सब्जी बनाने से पहले झींगी के दो टुकड़े कर छुरी की नोक से उसका जरा सा गुदा निकाल बिपुल की मां ने मुंह में डालकर चख लिया। कहीं झींगी कड़वी तो नहीं। झींगी और तोरी की कुछ प्रजातियां इतनी कड़वी होती हैं कि अगर सब्जी में पड़ जायें तो पूरी सब्जी कड़वी हो जाती है। इस कारण बिपुल की मां झींगी या तोरी की सब्जी बनाने के पहले उसे जरूर चख लेती है। झीगी कड़वी न थी। इसलिए वह छुरी से उसका छिलका उतारने लगी। तभी चुल्हे की ओर से ‘सों सों’ की आवाज आयी। दूध उफन रहा था। उफन कर जरा सा दूध तो पतीली के किनारे से गिरने भी लगा था। तुरंत झींगी और छुरी एक ओर फेंक, वह चुल्हे की ओर दौड़ी। लकड़ी से जलने वाले चुल्हे के पास मिट्टी के तेल का एक स्टोव भी था। उसी स्टोव पर उबलने के लिए उसने दूध चढ़ा दिया था। लकड़ी से जलने वाले दोहरे चुल्हे की एक तरफ चढ़ी दाल उफनने लगी थी। उसने कड़छी से फेन का कुछ हिस्सा निकालकर फेंक दिया। फिर सब्जी काटने बैठ गयी। आमतौर पर बिपुल की मां घर का सारा कामकाज सिलसिलेवार ढंग से ही किया करती है। […]

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सोमवार की सुबह

स्वामी और उसके दोस्त का प्रथम अंश सोमवार की सुबह थी। स्वामीनाथन की आंखे खोलने की इच्छा नहीं हो रही थी। सोमवार उसे कैलेंडर का सबसे मनहूस दिन लगता था। शनिवार और रविवार की मज़ेदार आजादी के बाद सोमवार को काम और अनुशासन के मूड़ में आना बहुत मुश्किल होता था। स्कूल के विचार से ही उसे झुरझुरी आ गयी वह पीली मनहूस बिल्डिंग जलती आंखों वाला कक्षा अध्यापक वेदनायकम और पतली लंबी छड़ी हाथ में लिए हैडमास्टर। आठ बजे तक वह अपने ‘कमरे’ में डेस्क पर विराजमान था। कमरा यानी पिता के ड्रेसिंग रूम का एक कोना यहीं उसकी मेज थी, जिस पर उसकी सभी चीजें, कोट, टोपी, स्लेट, दवात और किताबें अस्तव्यस्त पड़ी थी। स्टूल पर बैठकर उसने आंखे बंद कर लीं और याद करने लगा कि आज उसे क्या काम करना है। सबसे पहले गणित पांच सवाल लाभ हानि के, फिर अंग्रेजी आठवें पाठ के एक पृष्ठ को कापी पर लिखना, कठिन शब्दों के शब्दकोश से अर्थ लिखना, और फिर भूगोल। और उसके पास हैं सिर्फ दो घण्टे, जिनमें उसे यह ढेर सारा काम करना है और फिर स्कूल के लिए तैयार भी होना है। जलती आंखों वाले अध्यापक वेदनायकम कक्षा में लंबी खिड़की की तरफ पीठ […]

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