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Tag: बच्चों के लिए हिन्दी कविता

बांसुरी वाला

बात सात सौ साल पुरानी सुनो ध्यान से प्यारे हैम्लिन नामक एक शहर था वीजर नदी किनारे। यूं तो शहर बहुत सुन्दर था हैम्लिन जिसका नाम मगर वहां के लोगों का हो गया था चैन हराम। इतने चूहे इतने चूहे गिनती हो गई मुश्किल जिधर भी देखो जहां भी देखो करते दिखते किल बिल। बाहर चूहे घर में चूहे दरवाजे और दर में चूहे खिड़की और आलों में चूहे थालों और प्यालों में चूहे। ट्रंक...

मेरी रेल

A Train Adventure of Wild Animals
छूटी मेरी रेल। रे बाबू छूटी मेरी रेल। हट जाओ हट जाओ भैया मैं न जानूं फिर कुछ भैया टकरा जाये रेल। धक् धक् धक धक् धू धू धू धू भक् भक् भक् भक् भू भू भू भू छक् छक् छक् छक् छू छू छू छू करती आई रेल। एंजिन इसका भारी-भरकम। बढ़ता जाता गमगम गमगम। धमधम धमधम धमधम धमधम। करता ठेलस ठेल सुनो गार्ड ने दे दी सीटी। टिकट देखता फिरता टीटी। सटी...

चतुर चित्रकार

चित्रकार सुनसान जगह में बना रहा था चित्र। इतने ही में वहां आ गया यम राजा का मित्र।। उसे देखकर चित्रकार के तुरंत उड़ गये होश। नदी पहाड़ पेड़ फिर उसको कुछ हिम्मत आई देख उसे चुपचाप। बोला सुन्दर चित्र बना दूं बैठ जाइये आप।। उकरू मुकरू बैठ गया वह सारे अन्ग बटोर। बड़े ध्यान से लगा देखने चित्रकार की ओर।। चित्रकार ने कहा हो गया...

ना धिन धिन्ना

ना धिन धिन्ना पढ़ते हैं मुन्ना ताता थैया आ जा भैया ता थई ता थई ना भई ना भई धिरकिट धा तू सिर मत खा तू धीं तृक धीना झटपट रीना धा-धा-धा-धा अब क्या होगा धिरकिट धिरकिट गिरगिट गिरगिट धा धीना धीना धीना वो देखो दीनू बीना धा धीना नाती नक भैया गया है थक धन-धिन्ना धा धिनक इमली गई है पक ना तिन्ना तिरकिट तान कहना तू मेरा मान धिरकिट धिरकिट धिन जाऊंगा मैं वहां तिरकिट तिरकिट तिन ता चल जा तू झटपट...

बतूता का जूता

बतूता का जूता
इब्न बतूता पहन के जूता निकल पड़े तूफान में थोड़ी हवा नाक में घुस गई घुस गई थोड़ी कान में। कभी नाक को कभी कान को मलते इब्न बतूता इसी बीच में निकल पड़ा उनके पैरों का जूता। उड़ते उड़ते जूता उनका जा पहुंचा जापान में इब्न बतूता खड़े रह गये मोची की दुकान में बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book Trust

गड़बड़ घोटाला

यह कैसा है घोटाला कि चाबी मे है ताला कमरे के अंदर घर है और गाय में है गोशाला। दातों के अंदर मुंह है और सब्जी में है थाली रूई के अंदर तकिया और चाय के अंदर प्याली। टोपी के ऊपर सर है। और कार के ऊपर रस्ता ऐनक पे लगी हैं आंखें कापी किताब में बस्ता। सर के बल सभी खड़े हैं पैरों से सूंध रहे हैं घुटनों में भूख लगी है और...

चौका छक्का

धूम धड़क्का धूम धड़क्का सचिन का चौका सचिन का छक्का रह गए सारे हक्का बक्का चौका छक्का धूम धड़क्का कविता 1 हक्का बक्का : बच्चों के लिए 15 हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book Trust

कितनी बड़ी दिखती होंगी

कितनी बड़ी दिखती होंगी मक्खी को चीजें छोटी सागर सा प्याला भर जल पर्वत सी एक कौर रोटी। खिला फूल गुलदस्ते जैसा कांटा भारी भाला सा तालों का सूराख उसे होगा बैरगिया नालासा। हरे भरे मैदानों की तरह होगा इक पीपल का पात पेड़ों के समूहसा होगा बचा खुचा थाली का भात। ओस बूंद दरपनसी होगी सरसो होगी बेल समान सांस मनुज की आंधीसी करती होगी...

ज़रा चख के देखो

ज़रा चख के देखो ज़रा चख के देखो ये है बड़ी मज़ेदार ये है मज़ेकी नगर नगर में शहर शहर में देखों आगे पीछे चढता दाम सब चीज़ों का हम गिरते हैं नीचे ...जरा चख के देखो नये नगर में बजता हैं इक नये किसम का बाजा अब तो राजा गधा बनेगा गधा बनेगा राजा नसीब अपना टूटा फूटा नसीब अपना खोटा ज़मींदार का कु ...जरा चख के देखो बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for...

लकड़ी का घोड़ा

घो घो घो घोड़ा लकड़ी का घोड़ा चाबुक न कोड़ा जब इसको मोड़ा भागा ये घोड़ा भागा ये घोड़ा लकड़ी का घोड़ा घो घो घो घोड़ा। कविता 5 हक्का बक्का : बच्चों के लिए 15 हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book Trust

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