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Harindranath Chattopadhyaya

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ज़रा चख के देखो

ज़रा चख के देखो ज़रा चख के देखो ये है बड़ी मज़ेदार ये है मज़ेकी नगर नगर में शहर शहर में देखों आगे पीछे चढता दाम सब चीज़ों का हम गिरते हैं नीचे ...जरा चख के देखो नये नगर में बजता हैं इक नये किसम का बाजा अब तो राजा गधा बनेगा गधा बनेगा राजा नसीब अपना टूटा फूटा नसीब अपना खोटा ज़मींदार का कु ...जरा चख के देखोबच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for...

ताती ताती तोता

ताती ताती तोता पिंजरे में सोता पंख जो हरे थे उड़न से भरे थे हो गये हैं पीले पड़ गये हैं ढीले ताती ताती तोता। ताती ताती तोता पिंजरो में रोता झांखते हैं प्यारे नन्हें नन्हें तारे कहते है तोता काहे को तू रोता अंधकार छोड़ दे पिंजरो को तोड़ दे उड़ते उड़ते सारी रात आके मिल जा अपने साथ छोटे भाई तोता प्यारा तू भी बन जा एक सिताराबच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for children

रेलगाड़ी

आओ बच्चों रेल दिखायें छुक छुक करती रेल चलायें सीटी देकर सीट पे बैठो एक दूजे की पीठ पे बैठो आगे पीछे, पीछे आगे लाइन से लेकिन कोई न भागे सारे सीधी लाइन में चलना आंखे दोनों नीची रखना बंद आंखों से देखा जाए आंख खुली तो कुछ न पाए आओ बच्चों रेल चलायें सुनो रे बच्चों, टिकट कटाओ तुम लोग नहीं आओगे तो रेलगाड़ी छूट जायेगी आओ सब लाइन से खड़े हो जाओ मुन्नी...

नानी की नाव

नाव चली नाव चली नानी की नाव चली नीना की नानी की नाव चली लम्बे सफर पे सामान घर से निकाले गए नानी के घर से निकाले गए और नानी की नाव में डाले गए क्या क्या डाले गए एक छड़ी, एक घड़ी एक झाड़ू, एक लाड़ू एक सन्दूक, एक बन्दूक एक सलवार, एक तलवार एक घोड़े की जीन एक ढोलक एक बीन एक घोड़े की नाल एक घीमर का जाल एक लहसून, एक आलू एक तोता,...

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