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Shri Prasad

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जामुन

पौधा तो जामुन का ही था लेकिन आये आम। पर जब खाया तो यह पाया ये तो हैं बादाम। जब उनको बोया जमीन में पैदा हुए अनार। पकने पर हो गये संतरे मैंने खाये चार।बच्चों के लिए हिन्दी कविता Hindi poem for children first published by National Book Trust

अमरूद बन गये

आमों के अमरूद बन गये अमरूदों के केले मैंने यह सब कुछ देखा है आज गया था मेले बकरी थी बिलकुल छोटी सी हाथी की थी बोली मगर जुखाम नहीं सह पाई खाई उसने गोली छत पर होती थी खों खों खों मगर नहीं था बंदर बिल्ली ही यों बोल रही थी परसो मेरी छत पर गाय नहीं करती थी बां बां बोली वह अंगरेजी कहा बैल से, भूसा खालो देखा भालो, ए जी मुझको...

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