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Illustration for अमरूद बन गये

अमरूद बन गये

Shri Prasad 144 शब्द
अमरूद बन गये

आमों के अमरूद बन गये
अमरूदों के केले
मैंने यह सब कुछ देखा है
आज गया था मेले
बकरी थी बिलकुल छोटी सी
हाथी की थी बोली
मगर जुखाम नहीं सह पाई
खाई उसने गोली
छत पर होती थी खों खों खों
मगर नहीं था बंदर
बिल्ली ही यों बोल रही थी
परसो मेरी छत पर
गाय नहीं करती थी बां बां
बोली वह अंगरेजी
कहा बैल से, भूसा खालो
देखा भालो, ए जी
मुझको हुआ बड़ा ही अचरज
मुर्गा म्याऊं करता
हाथ जोड़कर बैठा
चुहे से था डरता
पर जब उगा रात में सूरज
चंदा दिन में आया
क्या होने को है दुनिया में
मैं काफी घबराया
तुरंत मूंद ली मैंने आंखें
और न फिर कुछ देखा
तभी लगा ज्यों जगा रही है
आकर मुझको रेखा
सपना देखा था अजीब सा
बिलकुल गड़बड़ झाला
सपनों की दुनियां में होता
सब कुछ बड़ा निराला।

समाप्त