कितनी बड़ी दिखती होंगी मक्खी को चीजें छोटी
सागर सा प्याला भर जल पर्वत सी एक कौर रोटी।
खिला फूल गुलदस्ते जैसा कांटा भारी भाला सा
तालों का सूराख उसे होगा बैरगिया नालासा।
हरे भरे मैदानों की तरह होगा इक पीपल का पात
पेड़ों के समूहसा होगा बचा खुचा थाली का भात।
ओस बूंद दरपनसी होगी सरसो होगी बेल समान
सांस मनुज की आंधीसी करती होगी उसको हैरान

बच्चों के लिए हिन्दी कविता
Hindi poem for children first published by National Book Trust