गोपाल के गाल
गोलम गोल लालम लाल
रंग सुनहरा आंखें सुंदर
घुंघराले से उसके बाल
छोटा सा वो नटखट भोला
करता कितने कई कमाल
कभी फोड़ वो मटकी देता
कभी हाथ ले बंसी लेता
चोरी माखन की भी करता
रोज़ मचाता कई धमाल
प्यारा फिर भी मीत सभी का
डरता जो वो उसकी ढाल
गोलम गोल लालम लाल
गोपाल के गाल।
बच्चों के लिए हिन्दी कविताएँ
Hindi poem for children
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