Pitara Kids Network

पेड़

आओ इस जंगल में आओ
मत घबराओ
मैं इस जंगल का एक पेड़
तुम्हें बुलाता हूं
अपनी कथा सुनाता हूं
आओ अपने साथियों से
मिलवाता हूं
आओ, छूकर देखो मेरा तना
सीधा और मज़बूत
और ऊपर
मेरी पतली बल खाती
शाखों को देखो
देखो अनगिनत टहनियों को
क्या पूछते हो मेरे दोस्त
वो तो पिछले पतझड़ में गिर गए
लेकिन जल्द ही फिर निकल आएंगे
मेरी डालियों पर लद जाएंगे।
मेरी जड़े नहीं दिखती तुम्हें
लेकिन वे हैं ज़मीन के नीचे
गहराई तक फैली हुई
वही सोखती हैं ज़मीन से पानी
मेरी प्यास बुझाने को
लो फूट आए मेरे हरे भरे कपड़े
लेकिन ये मेरी पोषाक ही नहीं
मेरी पोषाक भी हैं
हवा से खींचते हैं सांस
और सूरज से गर्मी
और बनाते हैं मेरी खुराक।
ये कीड़े मकोड़े
रेंगते, उड़ते, फुदकते हुए
ये सब मेरे दोस्त हैं
मैंने इन्हें
दरारों, छेदों, सुराखों में बसाया है
इनके अंडों को जाड़े गर्मी से बचाया है।
इनके बच्चों को अपने सीने पर सुलाया है।
इसी से खुश होकर
ये गाते हैं गीत
मधुर संगीत
भुन भुन, झिन झिन
और नाचते हैं
सारे सारे दिन।
रंग बिरंगे पंछी
मेरे पास आते हैं
मेरी टहनियों के बीच
अपने घोंसले बनाते हैं
चहकते हैं, गाते हैं
उड़ते हैं, मंडराते हैं
अपने नन्हें मुन्ने बच्चों को
उड़ना सिखाते हैं।
मुझे बच्चे बहुत प्यारे हैं
बच्चों को मैं प्यारा हूं
आते हैं मेरे साए में
ऊधम मचाने
लटकने मेरी डालियों से
झूले बनाने
मेरे खट्ठे मीठे फलों को
चोरी छिपे खाने
मुझे ध्यान से देखो
इस जंगल के
सभी पेड़ों को
प्यार से देखो
हमारा और तुम्हारा
कितना गहरा नाता है
ये जंगल सब प्राणियों के
कितने काम आता है
मेरी लकड़ी से बनी हैं
तुम्हारी मेज़े कुर्सियां
तुम्हारे सोने की चारपाई
तुम्हारे दरवाजे खिड़कियां
और तुम्हारी पेंसिल।
टीचर से पूछो
वो बतलाएंगी कि
मैं बारिश भी करवाता हूं
मिट्टी को बहने से बचाता हूं
बाढ़ भी रूकवाता हूं
और सूखा भी भगाता हूं
ये पूरा जंगल तुम्हारे काम आता है
तुम्हे कितना सुख पहुंचाता है।
लेकिन मुनाफाखोर व्यापारी
इसे अंधाधुंध कटवाता है
नए पेड़ नहीं लगवाता है
रोको रोको
उस लोभी को रोको
ऐसा करने से उसे टोको
नहीं तो एक दिन
ये जंगल खत्म हो जाएगा
सिर्फ ठूंठों का एक श्मशान रह जाएगा।

बच्चों के लिए हिन्दी कविता
Hindi poem for children by Safdar Hashmi; Illustrations by Micky Patel ; Published by SAHMAT.