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बतूता का जूता

Sarveshwar Dayal Saksena ● 70 शब्द

इब्न बतूता तूफ़ान में नाक-कान मलते हुए, उनका एक जूता उड़कर दूर आसमान में जापान की ओर जाता हुआ
इब्न बतूता पहन के जूता
निकल पड़े तूफान में
थोड़ी हवा नाक में घुस गई
घुस गई थोड़ी कान में।
कभी नाक को कभी कान को
मलते इब्न बतूता
इसी बीच में निकल पड़ा
उनके पैरों का जूता।
उड़ते उड़ते जूता उनका
जा पहुंचा जापान में
इब्न बतूता खड़े रह गये
मोची की दुकान में

बच्चों के लिए हिन्दी कविताएँ
Hindi poem for children first published by National Book Trust

✦ समाप्त ✦

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