<?xml version="1.0" encoding="utf-8" standalone="yes"?><rss version="2.0" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"><channel><title>Self Awareness on Pitara Kids Network</title><link>https://www.pitara.com/tags/self-awareness/</link><description>Recent content in Self Awareness on Pitara Kids Network</description><generator>Hugo</generator><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 25 Jul 1998 19:08:19 +0000</lastBuildDate><atom:link href="https://www.pitara.com/tags/self-awareness/index.xml" rel="self" type="application/rss+xml"/><item><title>चंपा</title><link>https://www.pitara.com/fiction-for-kids/hindi-poems-for-kids/%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%BE/</link><pubDate>Sat, 25 Jul 1998 19:08:19 +0000</pubDate><guid>https://www.pitara.com/fiction-for-kids/hindi-poems-for-kids/%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%BE/</guid><description>&lt;p&gt;मोर बोला,&lt;br&gt;
चंपा, चंपा,&lt;br&gt;
तू अपने चंपा को कपड़े&lt;br&gt;
क्यों नहीं पहनाती&lt;br&gt;
तू भी अजीब है&lt;br&gt;
पोलीएस्टर और नायलोन&lt;br&gt;
डेकोन और टेरीकोट,&lt;br&gt;
मुझे समझाती है&lt;br&gt;
तूने शायद मेरा रूप नहीं देखा,&lt;br&gt;
अरे हां,&lt;br&gt;
तूने अपना रूप देखा ही कहां है&lt;br&gt;
ड्रेस के नीचे अपना सूंदर पेट&lt;br&gt;
कभी देखा है&lt;br&gt;
अपने मोजों के भीतर का पैर&lt;br&gt;
कभी देखा है,&lt;br&gt;
नहीं, चंपा नहीं&lt;br&gt;
उन कपड़ों में सांस घुटती है,&lt;br&gt;
उन कपड़ों में काया सड़ती है,&lt;br&gt;
उन कपड़ों से बू रिसती है।&lt;br&gt;
और फिर,&lt;br&gt;
मेरे नाच का क्या होगा&lt;br&gt;
मेरे ठुमके का क्या होगा&lt;br&gt;
मेरे रंग रूप का क्या होगा&lt;br&gt;
मेरे कुहुक का क्या होगा&lt;br&gt;
मेरे ताज़गी का क्या होगा&lt;br&gt;
हार मानकर चंपा हाथी के पास गई&lt;br&gt;
हाथी दादा, हाथी दादा,&lt;br&gt;
तुम नंगे क्यों घूम रहे हो&lt;br&gt;
चलो, जंगल की बात छोड़ो&lt;br&gt;
लेकिन&amp;hellip; तुम तो बाजार&lt;br&gt;
और मंदिर में&lt;br&gt;
राजा की सवारी में भी,&lt;br&gt;
वैसे के वैसे&lt;br&gt;
तुम तो दिखते हो&lt;br&gt;
जैसे मिट्टी का ढेला&lt;br&gt;
तुम किसी से शरमाते नहीं&lt;br&gt;
तुम्हें कोई देख ले तो&lt;br&gt;
एक बात पूछूं&lt;br&gt;
तुम अपटूडेट क्यों नहीं लगते&lt;br&gt;
तुम सफारी सूट टाई तो पहनो&lt;br&gt;
बिना जूते मोजे कैसे बाहर निकला जाए&lt;br&gt;
कैसे हैं मम्मी पापा तुम्हारे&lt;br&gt;
जो तुम्हें कभी नहीं डांटते&lt;br&gt;
हाथी दादा, तुम बुरा न मानो&lt;br&gt;
प्यारे लगते हो तुम मुझको।&lt;br&gt;
तभी तो कहती हूं&amp;hellip;&lt;br&gt;
तभी तो कहती हूं&amp;hellip;&lt;br&gt;
चंपा बिटिया तू जानती है&lt;br&gt;
इस ढेले को सभी प्यार करते हैं&lt;br&gt;
भारत की धरती मां,&lt;br&gt;
सूरज और चंदा मामा,&lt;br&gt;
गंगा मां और कावेरी मां झाड़ी&lt;br&gt;
और जंगल और सब जीव जंतू।&lt;br&gt;
सभी गले लगाते मूझको,&lt;br&gt;
फिर कपड़ों की ज़रूरतएक बात कहूं तुमसे, सुन&lt;br&gt;
कल टी वी में मैंने गांधीबापू को देखा&amp;hellip;&lt;br&gt;
अधखुला शरीर&lt;br&gt;
बिन सिये एक ही कपड़े से ढका,&lt;br&gt;
वे खुद बनाते&lt;br&gt;
अपना कपड़ा&lt;br&gt;
पागल हुआ भारत देश सारा&lt;br&gt;
कताई करने लगे सभी&lt;br&gt;
तुम्हारे मम्मी पापा ने भी&lt;br&gt;
विदेशी कपड़ों की होली जलाई&lt;br&gt;
उन दिनों&lt;br&gt;
इंग्लैंड के राजा हम पर राज करते थे&lt;br&gt;
उन्होंने गांधीबापू को बुला भेजा था&amp;hellip;&lt;br&gt;
उन्होंने कहा,&lt;br&gt;
कपड़े बदलकर आओ।&lt;br&gt;
गांधीबापू ने कहा,&lt;br&gt;
जैसा हूं वैसा ही आऊंगा।&lt;br&gt;
राजा को उनकी बात माननी पड़ी&lt;br&gt;
और वे मिले वैसे ही।&lt;br&gt;
गांधीबापू की बातें सोचती&lt;br&gt;
लौटी चंपा घर को&amp;hellip;&lt;br&gt;
रास्ते में दो फूल मिले,&lt;br&gt;
साथ लिये दोनों को।&lt;br&gt;
घर आई. गई अपने कमरे में।&lt;br&gt;
दर्पण के सामने हुई खड़ी।&lt;br&gt;
उतार डाले कपड़े सभी&lt;br&gt;
जूते, मोजे, बक्कल भी&lt;br&gt;
लहरिया का एक टुकड़ा&lt;br&gt;
लिया शरीर पर लपेट।&lt;br&gt;
बालों में दो फूल लगाये।&lt;br&gt;
हुई दंग देख, खुद ही खुद को।&lt;br&gt;
अरे मैं तो सुन्दर दिखती हूं।&lt;br&gt;
मेरे पैर और मेरे हाथ,&lt;br&gt;
मेरी गर्दन, मेरे कंधे, सब कुछ।&lt;br&gt;
इतने में मां आ पहुंची।&lt;br&gt;
चंपा बिटिया, क्या हो रहा है&lt;br&gt;
मां, गांधीबापू की तरह&lt;br&gt;
एक कपड़ा लपेटा है।&lt;br&gt;
हाथीदादा ने मुझे&lt;br&gt;
गांधीबापू की बात बताई।&lt;br&gt;
मां, मैं कैसी दिख रही हूं&lt;br&gt;
तुम्हें गांधीबापू की बात याद है&lt;br&gt;
मां ने चंपा को चूम लिया।&lt;/p&gt;</description></item></channel></rss>