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पंख

Kusum Chamoli 47 शब्द

छोटे छोटे पंख हैं मेरे
कोमल हल्के प्यारे भी हैं
देखे हैं जो मैंने सपने
उसमें सूरज तारे भी हैं
पर क्या बोझल इन्हें बनाकर
मंजिल ऊंची चढ़ पाऊंगा
शब्द सुनहरे पढ़े बिना ही
राहें अपनी बढ़ पाऊंगा…

बच्चों के लिए हिन्दी कविताएँ
Hindi poem for children

समाप्त

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