ज़रा चख के देखो
ज़रा चख के देखो
ये है बड़ी मज़ेदार
ये है मज़ेकी
नगर नगर में शहर शहर में
देखों आगे पीछे
चढता दाम सब चीज़ों का
हम गिरते हैं नीचे
…जरा चख के देखो
नये नगर में बजता हैं
इक नये किसम का बाजा
अब तो राजा गधा बनेगा
गधा बनेगा राजा
नसीब अपना टूटा फूटा
नसीब अपना खोटा
ज़मींदार का कु
…जरा चख के देखो

बच्चों के लिए हिन्दी कविता
Hindi poem for children from Harindranath Chattopadhyaya’s “Curd Seller Verses”